सोचती हुँ कभी-कभी

सोचती हुँ कभी-कभी,

कुछ ऐसा हो जाए,

कि प्रदुषण और अज्ञानता,

दौनों ही मिट जाए।

प्रदुषण से है जीव – जंतु परेशान,

अज्ञानता से हम परेशान,

तो चलो दोस्तों सब मिलकर,

करदें इनकी फौज का सत्यानाश।

आओ साथियों प्रयत्न करो,

प्रदुषण, अज्ञानता का विनाश करो,

हर दाली पर खुशयाली के फूल खिले,

फिरसे विश्व भारत को सोने की चिड़िया कहे।

Natural Resourses

We need them,

We use them,

As they are the backbones of our life.

We don’t create,

We don’t generate,

But use them daily in our life.

Guess what?

Guess what?

Guess what do I mean?

Don’t trick me,

Don’t fool me,

I am hinting upon natural resources

In the reality of dreams!

Do save them,

Do save them,

For the future generations.

Don’t waste it,

Don’t waste it,

As they are precious.

मेरा विद्यालय

मेरा विद्यालय है महान,

होता नहीं यहाँ दाखिला आसान ।

पढ़ाई में लगा देते हैं जान,

खुशदिल बच्चे हैं इसकी शान

नौएडा – पुणे में छाया है,

हज़ारों इनाम लाया है ।

प्रतिवर्ष बच्चे नए कदम उठाते,

मान प्रतिष्ठा में चार चाँद लगाते ।

हमारे अध्यापक हैं ज्ञान के दाता,

शैतानी करना इन्हें ज़रा न भाता ।

जो बच्चे करते हैं अच्छे काम,

 उन्हें मिलते हैं ढेरों इनाम ।